TET Exams Notes

बालकों में चिंतन एवं अधिगम | Child Development and Pedagogy For CTET

बालकों में चिंतन एवं अधिगम 

दोस्तों इस पोस्ट में हम आपके साथ शिक्षक भर्ती परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण टॉपिक (बालकों में चिंतन एवं अधिगम) के नोट्स आप सभी के साथ शेयर कर रहे हैं  चिंतन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण बिंदु आपको इस पोस्ट में प्राप्त होंगे ।जो कि आगामी सभी शिक्षक भर्ती परीक्षा जैसे CTET,UPTET,RTET,HTET,TET के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है ।इससे संबंधित (बालकों में चिंतन एवं अधिगम) एक से दो प्रश्न परीक्षा में अवश्य पूछे जाते हैं ।यदि आप शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो यह टॉपिक आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी ।                                                 

 चिंतन का अर्थ (Meaning of Thought) 

Thinking and learning in children 

चिंतन एक जटिल मानसिक प्रक्रिया है “उसको सीखने ,स्मरण ,कल्पना आदि से अलग करना कठिन है।

ड्रेवर ने- चिंतन को मन की क्रिया कहा हैजबकि विचार मानसिक प्रक्रिया के समय मन की विषय वस्तु है एक चिंतन से तात्पर्य है मन के सामने  प्रत्ययो का आना- जाना परंतु दिवास्वप्न या मनो विलास और वास्तविक चिंतन में अंतर है दिवास्वप्न या मनो विलास में प्रत्यय अस्थाई अचानक होते हैं  चिंतन एक सक्रिय प्रक्रिया है।

  चिंतन की परिभाषाएं 

 चिंतन क्या है इसके लिए विभिन्न विद्वानों ने इसको कई प्रकार से परिभाषित किया है नीचे कुछ परिभाषाएं दी जा रही हैं-

1. डीवी के अनुसार

      “चिंतन सक्रिय संलग्न पूर्ण एवं  सावधानी पूर्ण विचार करता है यह किसी विश्वास या अनुमानित ज्ञान या उसके आधारों तथा प्रकाश में किन्हीं निष्कर्षों पर पहुंचता है।

2. राशि के अनुसार 

    “चिंतन संज्ञानात्मक संदर्भ में एक मानसिक प्रक्रिया है।

3. कालेसनिक के अनुसार

       “चिंतन प्रत्ययो  का पुनर्सगठन है।

4. वारेन के अनुसार

       ” चिंतन व्यक्ति के सामने समाधान के लिए उत्पन्न आदर्शआत्मक समस्या है जो प्रकृति में प्रतीकात्मक है तथा व्यक्ति को सक्रिय बनाती है जिससे प्रभावित होकर कुछ सीमा तक प्रयास एवं त्रुटि से वह प्रतीकात्मक प्रकार की प्रत्यायत्त्म्क  प्रक्रिया करता है।”

5. झा के अनुसार

  “चिंतन एक क्रियाशील प्रक्रिया है जिसमें मस्तिष्क विचारों की गति का नियंत्रण तथा नियमन सोद्देश्य रूप से करता है ।”

6. स्केनर के अनुसार

     “रचनात्मक चिंतन से तात्पर्य है कि व्यक्ति के निर्णय या उसके पूर्व कथन नए मौलिक अद्भुत तथा व्यक्तिगत है सृजनात्मक चिंतन में होता है जो नए क्षेत्र खोजता है नए निरीक्षण करता है नए पूर्व कथन करता है तथा नए निष्कर्ष निकालता है।”

7. वैलेंटाइन के अनुसार

     ” चिंतन शब्द का प्रयोग उस क्रिया के लिए किया जाता है जिसमें श्रंखला बाद विचार किसी लक्ष्य उद्देश की  और अभिराम गति से प्रवाहित होते हैं।

8.  रेबेर्न के अनुसार

    ” चिंतन इच्छा संबंधी प्रक्रिया है जो किसी असंतोष के कारण प्रारंभ होती है और प्रयास एवं त्रुटि के आधार पर चलती हुई अंतिम स्थिति पर पहुंच जाती है जो इच्छा को संतुष्ट करती है।”

9. क्रूज़ के अनुसार

      “चिंतन एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो जीवन की किसी अन्य प्रक्रिया की भांति चलती रहती है।”

10. जेपी गिलफोर्ड के अनुसार

     “चिंतन प्रतीकात्मक व्यवहार है जो सभी प्रकार के प्रतिस्थापन से संबंधित होते हैं।

 इन परिभाषा ओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि चिंतन में मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य किसी समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विचार करके उस समस्या के समाधान को तलाशता है।

सरल शब्दों में,” किसी भी समस्या के समाधान करने हेतु विचार करने वाली मानसिक प्रक्रिया को ही चिंतन कहते हैं । “

 चिंतन की विशेषताएं (Thinking and learning in children)

  •  चिंतन में मानसिक प्रक्रिया निहित होती है।
  • इसका कोई एक माध्यम होता है यह माध्यम भाषा या प्रतीकात्मक व्यवहार हो सकते हैं।
  •  चिंतन  के लिए किसी ना किसी प्रकार की समस्या का होना आवश्यक है जब तक कोई समस्या नहीं होगी चिंतन भी नहीं होगा।
  • इसमे में प्रयास एवं त्रुटि के तत्व निहित रहते हैं।
  •  चिंतन स्थूल से सूक्ष्म की ओर चलता है।
  •  इसमे में विश्लेषण एवं संश्लेषण की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
  •  यह प्रत्यक्षीकरण ना होकर प्रमुख रूप से विचार तथा प्रतीक होते हैं।
  •  चिंतन अत्यंत ही जटिल प्रक्रिया है किंतु इसमें संज्ञानात्मक पक्ष का अपेक्षाकृत अधिक महत्व होता है।

चिंतन के प्रकार

प्रत्यक्षआत्मक चिंतन –

प्रत्यक्ष आत्मक चिंतन का संबंध हमारी ज्ञानेंद्रियों से होता है इस प्रकार का चिंतन अधिकतर पशुओं या बालक को में पाया जाता है। ज्ञानेंद्रियों से संबंधित ज्ञान को ही प्रत्यक्ष ज्ञान कहा जाता है। 

कल्पनात्मक चिंतन

 इस प्रकार के चिंतन में प्रत्येक वस्तु का अभाव होता है परंतु इस कमी की पूर्ति कल्पना द्वारा कर ली जाती है। ऊपर वर्णित प्रत्यक्ष आत्मक चिंतन का संबंध वर्तमान से रहता है परंतु कल्पनात्मक चिंतन भविष्य से संबंधित होता है इसमें स्मृति का प्रमुख हाथ होता है।

प्रत्यात्मक चिंतन-

 इस चिंतन का आधार प्रत्यय होते हैं   प्रत्ययो को सुख सुविचार कहा जा सकता है ।प्रत्यय भाषा के साथ साथ चलते हैं शब्द और प्रत्यय को अलग अलग नहीं किया जा सकता है एक जैसे पदार्थों और उनकी गुणों का ज्ञान जिन विशेष शब्दों से होता है उन्हें प्रत्यय कहते हैं।

         जैसे- जब बालक बिल्ली शब्द का उच्चारण करते हैं तो उनके चिंतन में कोई विशेष बिल्ली ना होकर समस्त बिल्ली जाति तथा उसके गुण होते हैं।

4   तार्किक चिंतन-

 यह सर्वोच्च  प्रकार का चिंतन होता है, इस प्रकार के चिंतन में कोई व्यक्ति विभिन्न विचारों का प्रयोग किसी विशिष्ट लक्ष्य को ध्यान में रखकर करता है। मनुष्य इस प्रकार के चिंतन में एक दूसरी वस्तु या घटना के मध्य संबंध स्थापित करने का प्रयास करता है।

5   निर्देशित चिंतन-

 निर्देशित चिंतन से अभिप्राय व्यक्ति के द्वारा किसी विशिष्ट या लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले चिंतन से होता है। इस प्रकार के चिंतन में व्यक्ति का व्यवहार उसके जीवन की ज्ञात एवं स्पष्ट लक्षण से निर्देशित होता है।

6   निर्देशित चिंतन

 इस प्रकार के चिंतन में मनुष्य किसी स्पष्ट उद्देश्य और लक्ष्य के बिना ही निर्देशित हुए चिंतन प्रक्रिया को जारी रखता है इस प्रकार का चिंतन प्राया दिवास्वप्न स्वतंत्र सहचार्य कल्पना की उड़ान जैसे अनिर्देशित घटनाओं से परिचालित होता है।

7   परावर्तित चिंतन-

 मनुष्य जीवन के विभिन्न पहलुओं और उन में किए जाने वाले व्यवहार प्रति मानव को सार्थक बनाने के लिए इस प्रकार का चिंतन किया जाता है यह एक उच्च स्तरीय चयन की प्रक्रिया मानी जाती है इस चिंतन के द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने जटिल कार्यों या समस्याओं का समाधान करता है।

 चिंतन के साधन

 मनोवैज्ञानिकों के अनुसार चिंतन की प्रक्रिया साधनों के माध्यम से तेज होती है-

1 प्रति बोधन-  चिंतन की प्रक्रिया को प्रतिवेदन के माध्यम से उत्तेजना मिलती है 

जैसे– यदि कोई अध्यापक किसी बालक को किसी से झगड़ते हुए देखता है तो वह अपने अनुभवों से उसके व्यवहार का अध्ययन कर सकेगा और उसकी झगड़ने की आदत को सुधार सकेगा।

2  प्रतिमा-  प्रतिमा चिंतन का एक प्रमुख साधन है व्यक्ति के पूर्व अनुभव प्रतिमाओं के रूप में विद्यमान रहते हैं। यह प्रतिमा इतनी शक्तिशाली होती है कि इनमें तथा प्रत्यक्ष में बहुत कम अंतर रहता है। 

जैसे- यदि बालक घर में बैठा बैठा अपनी कक्षा के बारे में चिंतन करता है तो वह अध्यापक मेज कुर्सी श्यामपट्ट सहपाठी आदि की एक स्पष्ट मानसिक पुनर उत्पत्ति करता है जिसे प्रतिमा कहा जाता है।

प्रत्यय-  प्रत्यय चिंतन का महत्वपूर्ण आधार है, प्रतिघटना या वस्तु का प्रत्यय व्यक्ति के मन में होता है जो चिंतन प्रक्रिया में सहायक होता है ।

जैसे – यदि किसी छात्र से पूछा जाए कि चार पैर एक पहुंच रहा ना दूध देने वाला पालतू आदि गुणों के आधार पर उसके मन में कौन सी अवधा या प्रत्यय आता है तो इन गुणों के आधार पर छात्र का सामान्य निष्कर्ष है -गाय

4   भाषा-    चिंतनकी प्रक्रिया में व्यक्ति की भाषा के माध्यम से स्वयं से बातचीत करता है इसलिए चिंतन को आंतरिक भाषण भी कहा जाता है।विभिन्न प्रयोगों द्वारा यह स्पष्ट हुआ है कि किसी समस्या का समाधान करते समय चिंतन करने वाले व्यक्ति की बागी इंद्रिय जैसे जीव तथा स्वतंत्र में कुछ पेशी संकुचन होते हैं।

संकेत एवं  चिन्ह- चिंतन में संकेत एवं चिन्ह विधायक होते हैं ।जब संकेत किसी चैतन्या क्रियात्मक अनुक्रिया के लिए उद्दीपन के रूप में कार्य करता है, तो उसे जन्नत कहते हैं फतेह चंद व्यक्ति को उत्तेजित करके चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है।

6   सूत्र–   सूत्र चिंतन में सहायक होते हैं एक छोटे सूत्र से व्यापक अर्थ निहित होता है विज्ञान तथा गणित में चिंतन को सूत्रों के सहारे ही विकसित किया जाता है।

 चिंतन के विषय में स्पियरमन के नियम

 चिंतन की प्रक्रिया एक जटिल प्रक्रिया होती है यह प्रक्रिया जटिल होने के साथ ही साथ नियमित दी होती है ।इस प्रक्रिया की व्याख्या करने के लिए एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक यार मैंने कुछ नियम प्रतिपादित किए थे।

1  संबंधों का  पृथककीकरण –  गुण , काल गत संबंध, स्थान गत संबंध, कार्य कारण संबंध, वस्तु का संबंध, निर्माणात्मक संबंध, अन्य संबंध

2    सहा संबंधों का पृथककीकरण

चिंतन प्रक्रिया

 चिंतन प्रक्रिया का निम्नलिखित चार सोपानो में विश्लेषण करके अच्छे ढंग से समझा जा सकता है

किसी लक्ष्य की ओर उन्मुख होना –

व्यक्ति के सम्मुख जब कोई समस्या उत्पन्न होती है तब वह उस समस्या का समाधान करने के लिए चिंतन करता है चिंतन का लक्ष्य समस्या को दूर करना होता है। 

लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रयास करना-

 चिंतन में व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहता है उसका प्रयास होता है कि शीघ्र अति शीघ्र समस्या का समाधान हो जाए। 

3  पूर्व अनुभवों का स्मरण करना-

 चिंतन में व्यक्ति अपने पुराने अनुभवों का पुनः स्मरण करता है जिससे उनके आधार पर वह वर्तमान समस्या का समाधान करने में समर्थ हो सके

पूर्व अनुभवों को वर्तमान समस्या से संयोजित करना-

 जब व्यक्ति अपने पूर्व अनुभवों के आधार पर वर्तमान समस्या का समाधान खोजने का प्रयास करता है तब उसके सम्मुख समस्या की अनेक संभावित समाधान उपस्थित होने लगते हैं

 चिंतन का शैक्षिक महत्व

 सफल जीवन के लिए चिंतन अत्यंत आवश्यक है चिंतन वस्तुतः व्यक्ति की वह मानसिक क्रिया है जो उसे अन्य व्यक्तियों से दृष्ट बनाती है।  शैक्षिक अथवा व्यवसाय क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति की चिंतन शक्ति का महत्वपूर्ण योगदान रहता है ।  अतः अध्यापकों को बालकों की चिंतन शक्ति को विकसित करने की यात्रा संभव प्रयास करने चाहिए। 

बालकों में चिंतन एवं अधिगम से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न 

  •  चिंतन में शामिल हैं।  – कल्पना, भाषा ,संकल्पना और प्रतिज्ञप्ति 
  •   सृजनात्मकता मुख्य रूप से संबंधित है।  -अपसारी चिंतन
  • चिंतन अनिवार्य रूप से है, एक –संज्ञानात्मक गतिविधि
  • सृजनात्मक चिंतन सदैव होता है।  -रचनात्मक
  •  चिंतन की दृष्टि से किसी बच्चे में सर्वश्रेष्ठ चिंतन है।  –तार्किक चिंतन
  •  कौन चिंतन की प्रक्रिया में सबसे कम महत्वपूर्ण है।  – मांसपेशीय क्रियाएं
  •  चिंतन तथा तर्क का उद्देश्य है।  –समस्या का समाधान करना
  •   तार्किक चिंतन इसका एक आवश्यक अंग है।  -समस्या समाधान का
  •  रचनात्मक चिंतन में अंतिम सोपान निम्नलिखित में से कौन सा है।  – जांच
  •  विज्ञान और गणित में चिंतन  किन के बिना संभव नहीं है।  – चिन्ह और सूत्र
  •  वस्तुओं की अनुपस्थिति में उनके विषय में चिंतन किससे प्राप्त होता है।  -प्रतीक
  •  मनुष्य में चिंतन के विकास में प्रथम सोपान कौन सा है।  –सर्वजीवबाद
  • चिंतन की सबसे अधिक महत्वपूर्ण उपकरण कौन से हैं।  –सम प्रत्यक्ष
  •  किस मनोवैज्ञानिक में भाषा हीन और भाषा युक्त चिंतन में अंतर किया है।  -मूल
  •  चिंतन की प्रक्रिया में सबसे कम महत्वपूर्ण होता है।  –  सामान्यीकरण

दोस्तों इस पोस्ट में हमने शिक्षक भर्ती के लिए महत्वपूर्ण टॉपिक (बालक को में चिंतन) से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं का विस्तार पूर्वक अध्ययन किया है, जो आपकी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।  ऐसे ही महत्वपूर्ण बिंदुओं का अध्ययन करने के लिए हमारी वेबसाइट स्टडी सफर पर विजिट करते रहें ,धन्यवाद!

ये भी जाने :-

Environmental Study Important One-Liner for CTET Exam 2019

Shiksha Manovigyan Ke Pratipadak: शिक्षा मनोविज्ञान के सिद्धांत व प्रतिपादक

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

To Top
error: Content is protected !!