TET Exams Notes

Paryavaran Adhyayan ki Shikshan Vidhiyan for CTET 2020

CTET 2020 : Teaching Methods of Environmental Studies (पर्यावरण अध्ययन की शिक्षण विधियां) || For MPTET 2020|| REET 2020

नमस्कार! दोस्तों Study safar.com में आप सभी का स्वागत है।आज इस (Paryavaran Adhyayan ki Shikshan Vidhiyan for CTET 2020) आर्टिकल में हम जानेंगे पर्यावरण शिक्षण की कुछ महत्वपूर्ण विधियां

Advertisement
जो आगामी शिक्षक भर्ती परीक्षा जैसे -MPTET,CTET,& REETआदि की दृष्टि से अत्यंत ही महत्वपूर्ण है इस पोस्ट में हमने सभी पर्यावरण शिक्षण की विधियों को विस्तार पूर्वक समझाया है। जिससे आपको पर्यावरण शिक्षण से संबंधित प्रश्न को हल करने में सहायता मिलेगी।

पर्यावरण अध्ययन की शिक्षण विधियां (Teaching Methods of Environmental Studies)

विभिन्न प्रकार के शिक्षण विधियों का सहारा लेकर पर्यावरण अध्ययन को रोचक, प्रभावशाली , बोधगम्य एवं ग्राह्म बनाया जाता है जैसे किसी प्रकरण को पढ़ाते समय कहानी, कविता ,पहेली, चित्र, चार्ट, वीडियो, फिल्मी या प्रकरण के अनुसार विद्यार्थियों को किसी विशेष स्थान पर ले जाया जाता है ताकि अधिक से अधिक ज्ञानेंद्रियों का उपयोग करने से उसका ज्ञान स्थाई हो जाए। 

पर्यावरणीय अध्ययन के कुछ मुख्य शिक्षण विधियां निम्न है:-

  1. भ्रमण विधि (Field trip)
  2. प्रदत्त कार्य विधि (Assignment)
  3. प्रयोग प्रदर्शन विधि (Demonstration method)
  4. समस्या समाधान विधि (Problem solving method)
  5. प्रयोजन विधि (Project method)
  6. अन्वेषण अथवा खोज विधि (Heuristic method)

१. भ्रमण विधि (field trip)

“प्रो. रैन” इस विधि के जन्मदाता माने जाते हैं।  इस विधि में विद्यार्थियों को प्रकृति के निकट ले जाया जाता है जैसे दूरदर्शन केंद्र, रेडियो स्टेशन, बिजली घर, पार्क ,चिड़ियाघर इत्यादि। और भ्रमण से छोटे बच्चों को बहुत लाभ होता है उन्हें कक्षा  से वास्तविक संसार की ओर ले जाया जाता है। 

भ्रमण की योजना:-

१) भ्रमण स्थल का चुनाव

२) भ्रमण की तैयारी

३) आवश्यक सामग्री

४) पर्यटन का मूल्यांकन

२. प्रदत्त कार्य(assignment)

जब एक विद्यार्थी, विद्यार्थियों के समूह अथवा संपूर्ण कक्षा को कुछ विशेष शिक्षक उत्तरदायित्व दिया जाता है  तब इस प्रकार के कार्य को प्रदत कार्य कहा जाता है। 

३. प्रयोग प्रदर्शन विधि (Demonstration method)

इस विधि में शिक्षक विद्यार्थियों के समक्ष प्रयोग प्रदर्शन कर विषय वस्तु को स्पष्ट करता है जिसमें उनकी सहभागिता भी ली जाती है, इसे बहुत संवेदी शिक्षण विधि (multi-sense approach) भी कहा जाता हैं। इस विधि में विद्यार्थी देखता, सुनता और करके सीखता है, इससे ज्ञान स्थाई और स्पष्ट हो जाता है। 

४. समस्या समाधान विधि (problem solving method)

इस विधि में मानसिक क्रियाओं पर बल दिया जाता है।  अध्यापक द्वारा विद्यार्थियों के सम्मुख समस्या प्रस्तुत की जाती है जिसका समाधान विद्यार्थी अपने सीखे हुए नियम, सिद्धांत एवं प्रत्ययों की सहायता से करते हैं। कठिनाई के स्तर का ध्यान रखकर समस्याओं का चयन किया जाता है। 

इसके पद हैं:-

  1. समस्या की उत्पत्ति एवं चयन
  2. समस्या की परिभाषीकारण
  3. आवश्यक प्रदत्तों एवं तथ्यों का संकलन
  4. परिकल्पना का निर्माण एवं परीक्षण करना
  5. सामान्ययीकरण
  6. निष्कर्षों के सतत का मूल्यांकन

५. प्रयोजना विधि (project method)

  • Give idea:- John Dewey
  • Promote/famous:– kill patric

किलपैट्रिक के अनुसार प्रयोजन वह सहृदय उद्देश्य पूर्ण कार्य हैं ,जिसे लगन के साथ सामाजिक वातावरण में संपन्न किया जाता है जो व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों प्रकार के हो सकते हैं। 

इस विधि के विभिन्न सोपान हैं:-

  1. अवस्था बनाना
  2. विषय वस्तु का चयन
  3. योजना बनाना
  4. प्रयोग को करना
  5. प्रतिपुष्टि
  6. रिपोर्ट तैयार करना
  7. मूल्यांकन

(Paryavaran Adhyayan ki Shikshan Vidhiyan for CTET 2020)

६. अन्वेषण अथवा खोज विधि (Heuristic method)

  • इस विधि के जनक एच. ई. आर्मस्ट्रांग है। 

“Heuristic”शब्द की उत्पत्ति यूनानी भाषा से हुई है जो “Hurisco”शब्द से बना है इसका अर्थ होता है मैं खोजता हूं यह मालूम करता हूं। 

यह शिक्षण की एक ऐसी विधि है जिसमें विद्यार्थी अनुसंधानकर्ता के रूप में कार्य करता है उन्हें कुछ बताया नहीं जाता वह खुद ही खोज करते हैं।  इस विधि का प्रयोग विज्ञान ,सामाजिक विज्ञान, प्रत्त्यों एवं सिद्धांतों के प्रतिपादन में किया जाता है। 

 

“सभी प्रतियोगी परीक्षाओ से संबन्धित सभी जानकारी सबसे पहले प्राप्त करने के लिए आप हमारे social media handle से जुड़ सकते है जिसकी लिंक नीचे दी गई है”

facebook – Click here to Join

Telegram- Click here to Join

 

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Close
Close