Bhasha Shikshan ki vidhiyan for CTET 2020

Bhasha Shikshan ki Vidhiyan ||For CTET,DSSSB,NVS,HTET,MPTET 2020

नमस्कार! दोस्तों आज के आर्टिकल में हम हिंदी भाषा (Bhasha Shikshan ki vidhiyan for CTET 2020) शिक्षण की कुछ महत्वपूर्ण विधि सांझा करने जा रहे हैं जो कि आने वाले सभी की शिक्षक भर्ती परीक्षा जैसे-CTET,MPTET,HTET,KVS,DSSSB  की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है इस टॉपिक से संबंधित परीक्षा में अवश्य ही पूछे जाते ही आर्टिकल आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है

भाषा मानव जीवन का एक अभिन्न अंग है जिसके बिना मानव के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती भाषा के माध्यम से ही व्यक्ति अपने विचारों का आदान प्रदान करता है इस भाषा शिक्षण के लिए विभिन्न शिक्षण विधियां अपनाई जाती हैं जिसके माध्यम से शिक्षा का स्तर बेहद सरल हो जाता है और शिक्षार्थियों का ध्यान आकर्षित होता है

  1. भाषा शिक्षण विधियां
  2. हिंदी शिक्षण की विधियां

a.गद्य शिक्षण

b.पद्य शिक्षण 

c.व्याकरण शिक्षण

भाषा शिक्षण की विधियां

1. व्याकरण विधि

इस विधि में भाषा की तुलना व्याकरण के ज्ञान पर जोर दिया जाता है तथा व्याकरण के नियमों का ज्ञान करवाया जाता है

व्याकरण अनुवाद विधि इस विधि के अंदर मातृभाषा के माध्यम से दूसरी भाषा सिखाई जाती है

जैसे- तुम्हारा नाम क्या है?  what is your name?

मातृभाषा- हिंदी

लक्ष्य भाषा -अंग्रेजी

  • भाषा सीखने की सर्वाधिक प्रचलित और प्राचीनतम विधि है
  • भाषा कौशल की दक्षता प्रदान करना है इसका प्रमुख उद्देश्य है
  • बोलने की अपेक्षा लिखने और पढ़ने पर तथा भाषा के तत्वों पर अधिक ध्यान दिया जाता है
  • दोष लक्ष्य भाषा को कम महत्व दिया जाता है
  • यह भाषा शिक्षण की वैज्ञानिक विधि नहीं है

जॉन बी शैडो ने इसका विरोध किया और कहा भाषा शिक्षण में पहले बोलने और पड़ने पर बल देना चाहिए व्याकरण पर बाद में

2.प्रत्यक्ष विधि –

इसके अंतर्गत सीखने वाले को सीखी जाने वाली भाषा के सीधे संपर्क में लाया जाता है और मौके का अभ्यास के सहारे सिखाया जाता है इसलिए इसे मौखिक वार्तालाप विधि भी कहते हैं इसमें भाषा के दो आधारभूत कौशल सुनना और बोलना है

3. संप्रेषण परक भाषा शिक्षण विधि

प्रत्यक्ष विधि में भाषा सीखने के व्यावहारिक पक्ष पर बल दिया जाता है और इसी पक्ष को प्रबल बनाने के लिए विधि सामने आई

इस विधि के अनुसार भाषा को नियम बद व्यवस्था के रूप में सीखना ही पर्याप्त नहीं है उसे सामाजिक संप्रेषण की वस्तु के रूप में सीखना चाहिए

भाषा सीखने से आशय है उसे सामाजिक सांस्कृतिक नियमों को अच्छी तरह से सीखना

4. अनुकरण विधि

इस विधि में बालक शिक्षक का अनुकरण करके सीखता है

  1. लिखित अनुकरण
  2. उच्चारण अनुकरण
  3. रचना अनुकरण

1.लिखित अनुकरण /रूपरेखा अनुकरण इसने वाक्य या अक्षर बिंदु रूप में लिखे रहते हैं 

a.स्वतंत्र अनुकरण –अध्यापक श्यामपट्ट पर या अभ्यास पुस्तिका पर लिख देता है और उसका अनुकरण करके लिखने को कह देता है

b.मांटेसरी विधि- इस विधि में आंख कान और हाथ की नो की सहायता ली जाती है बालक अक्षरों को देखकर उनकी ध्वनि को कानों से सुन कर उसके पश्चात उभरे हुए अक्षरों पर उंगली फिरता है

c.पेस्टोलॉजी विधि-इस विधि में अक्षर को खंडों में सिखाया जाता है जैसे का को लिखने लिखना हो तो पहले इस जीरो एक सिरका आदि लिखकर का बनाया जाता है

d.जैकपॉट विधि –इस विधि को शिक्षा शास्त्री जैकपॉट ने प्रस्तुत किया था इसमें बालक स्वयं संशोधन करता है

2.उच्चारण अनुकरण- इसमें बालक अध्यापक के शब्दों का उच्चारण करता है और सीखता है

3.रचना अनुकरण – विधि किस विधि में जिस भाषा शैली में रचना करनी होती है उसी भाषा या शैली में रचना को विद्यार्थी के सामने प्रस्तुत किया जाता है

जैसे-  दीपावली पर लेख बताकर होली पर लिखने को बोला जाता है यह उच्च कक्षाओं के लिए ही उपयुक्त है

5. इकाई विधि

इस विधि के अंदर छात्र सीखने में शारीरिक और मानसिक रूप से इस प्रकार व्यस्त रहते हैं कि प्राप्त ज्ञान के माध्यम से वे नई परिस्थितियों के साथ समायोजन कर सकें

  • 1926 में डॉक्टर मॉरिसन ने इकाई संगठन के 5 पद दिए
  • पूर्व ज्ञान इसके अंतर्गत अध्यापक छात्रों के पूर्व ज्ञान का पता लगाता है
  • प्रस्तुतीकरण यहां अध्यापक नवीन ज्ञान को छात्रों के समक्ष प्रस्तु प्रस्तुत करता है
  •  आत्मीय करणछात्र नवीन ज्ञान को आत्मसात करने के लिए अनेक किया है करते हैं जैसे पढ़ना लिखना बाद में बात करना पूछना तर्क करना आदि इससे कक्षा की व्यवस्था अव्यवस्थित हो जाती है
  • संगठन अव्यवस्थित कक्षा को पुनः संगठित करके अर्जित ज्ञान को तार्किक रूप में लिखने को बोला जाता
  • अभिव्यक्ति अध्यापक छात्रों के ज्ञान को अनेक प्रकार से दोहराता है

6.स्वाभाविक विधि

इस प्रक्रिया के अंदर एक छोटा बालक स्वाभाविक रूप से अनुकरण करके भाषा सीख लेता है इस प्रक्रिया में सबसे पहले सुनना और समझना इसके बाद उच्चारण करना तथा अंत में पढ़ना और लिखना सीखना है

7.अक्षर बोध विधि

यह प्राचीन शिक्षण विधि है इसमें सबसे पहले स्वर और व्यंजन का ज्ञान कराया जाता है और फिर शब्द और वाक्य का क्रम सिखाया जाता है

(Bhasha Shikshan ki vidhiyan for CTET 2020)

8.धन्यआत्मक विधि

इस विधि में अर्थ की अपेक्षा ध्वनि पर अधिक ध्यान दिया जाता है

बार-बार अभ्यास से उच्चारण स्थिर हो जाता है उच्चारण स्पष्ट करने के लिए लिंगुअफोन ईयर फोन टेप रिकॉर्डर आदि का सहारा लिया जाता है

इस विधि में अंग्रेजी शब्दों के उच्चारण में शुद्धता आती है जैसे-cut,but,bat

9.समवायविधि

  • यह भाषा संसर्ग विधि का दूसरा रूप है
  • इसमें गद्य शिक्षण के दौरान ही साथ साथ व्याकरण की शिक्षा दी जाती है लेकिन व्याकरण की केवल व्यवहारिक शिक्षा भी दी जाती है
  • यह विधि भाषा संसद का विधि की अपेक्षा अधिक अच्छी है

10.संघटना परक विधि

इस विधि के अंदर शिक्षक स्वयं या टेप रिकॉर्डर के माध्यम सेपूरा संवाद सुनाता है विद्यार्थी उसको कंठस्थ कर लेते हैं उसके बाद अर्थ समझा कर उसका अभ्यास कराया जाता है

11.अनुवाद विधि

इसके अंतर्गत अर्थ की समानता के आधार पर एक भाषा का दूसरी भाषा में अंदर अनुवाद किया जाता है

इसकी तीन चरण है

  1. पठान तथा पाठ विश्लेषण
  2. संक्रमण का पुनर्गठन
  3. लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति

अनुवाद की प्रक्रिया मुख्य रूप से अर्थ के ग्रहण तथा संप्रेषण की प्रक्रिया है

12.संरचनात्मक अथवा गठन विधि

यह भी किसी की जाने वाली भाषा की संरचना सीखने पर अधिक बल देती है इसके अंतर्गत मौखिक अभ्यास पर बल दिया जाता है

13.निर्दिष्ट कार्यविधि

इस विधि के अंतर्गत छात्रों को पाठ पढ़ाने से पहले ही उस पाठ को से संबंधित कार्य दे दिया जाता है जैसे कुछ कठिन शब्दों का अर्थ कविता याद करना पाठ से संबंधित प्रश्न घर से याद करके ले ली लाने को कहा जाता है

इसी बालकों में स्वयं विचार करने और सीखने की आदत पड़ जाती है

14.पर्यवेक्षक विधि

इस विधि के अंतर्गत विद्यार्थियों को कार्य दे दिया जाता है और छात्र बिना किसी सहायता की उस कार्य को करते हैं इसके कारण छात्रों में स्वयं कार्य करने की आदत हो जाती है

15.खेल विधि

खेल द्वारा शिक्षार्थी आनंद पूर्वक शिक्षा ग्रहण करते हैं कोल्डवेल कोक महोदय का कहना है कि केवल श्रवण और पठान मात्र से ही शिक्षा पूरी नहीं होती बल्कि इसके लिए रुचि पूर्ण स्वाध्याय और स्वानुभूति की आवश्यकता होती

  • कुक महोदय ने अपनी पुस्तक प्लीज भी तथा रॉय बर्मन ने प्लेवे संजय में भाषा शिक्षण के लिए कुछ खेलों का सुझाव दिया है
  • अक्षरों सब तो वाक्यांश और वाक्यों की पहचान द्वारा
  • रचना संबंधी खेल द्वारा
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