Pavlov ka Anukulit Anukriya Siddhant For CTET 2020

CTET 2020 : पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत (Pavlov’s principle of optimized response)

नमस्कार! दोस्तों Studysafar.com में आप सभी का स्वागत है । आज  इस आर्टिकल में मनोविज्ञान (Pavlov ka Anukulit Anukriya Siddhant For CTET 2020) का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत आपके साथ शेयर कर रहे हैं।  जिसका नाम है, “पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत”  इस सिद्धांत से संबंधित प्रश्न सभी शिक्षा भर्ती परीक्षा में अवश्य ही पूछे जाते हैं एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है इस सिद्धांत को हमने इस आर्टिकल में विस्तारपूर्वक समझाया है। तथा इससे संबंधित  प्रश्न उत्तर आपके साथ साझा किए हैं, आशा है यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा।

पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत (Pavlov ka Anukulit Anukriya Siddhant) 

प्रतिपादक (अनुबंधन) का जनक- ई पी पावलाव

जन्म-  26 सितंबर 1849 रियाजान, रूस

मृत्यु – 27 फरवरी 1936 मास्को, रूस

पवलाव

  • ई पी पावलाव रूसी वैज्ञानिक थे।  इनका पूरा नाम ईवान पात्रोंविच पावलव’ था।
  • इन्होंने पाचन क्रिया के दैहिकी का विशेष रूप से अध्ययन किया और उनका यह अध्ययन इतना महत्वपूर्ण एवं लोकप्रिय हुआ कि 1904 ईस्वी में इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार भी दिया गया।
  • ई पी पावलाव को अनुबंधन का जनक कहा जाता है।
  • मनोवैज्ञानिक के साथ-साथ पावलाव एक चिकित्सक भी थी।
  • पावलव ने कुत्ते की पैरोटिड ग्रंथि का ऑपरेशन का लार का एकत्रीकरण किया।
  • इस प्रयोग द्वारा पावलव में यह निष्कर्ष निकाला कि यदि लंबे समय तक स्वाभाविक तथा अस्वाभाविक उद्दीपन का एक साथ प्रस्तुत किए जाएं तो व्यक्ति अस्वाभाविक उद्दीपन के प्रति भी स्वाभाविक जैसी अनुक्रिया करने लगता है जिसे अनुकूलित अनुक्रिया अथवा अनुबंधित अनुक्रिया कहते हैं।

पावलव    s- प्रकार

  • प्रयोग    –    कुत्ते पर प्रयोग किया
  • जब कुत्ते के सामने भोजन रख दिया जाता था।  जो हमारा उद्दीपक है, तो जैसे ही भोजन रखा जाता तो कुत्ते के मुंह में लार की वृद्धि होती है
  • इन्होंने कुत्ते को रस्सी से बांध दिया था।

प्रथम चरण

स्वाभाविक उद्दीपक =  स्वाभाविक प्रतिक्रिया

(भोजन)                           (लार निकलना)

द्वितीय चरण

घंटी           +                  भोजन         =                     लार निकलना

(कृतिम उद्दीपक)    (स्वाभाविक उद्दीपक)           (स्वाभाविक प्रतिक्रिया)

तृतीय चरण

घंटी              =          लार निकलना

(कृतिम उद्दीपक)      (स्वाभाविक प्रतिक्रिया)

  • नोट- घंटी भोजन के मध्य समय – 2 से 4 सेकंड
  • भोजन को घंटी से अधिक प्रभावशाली होना चाहिए।

इस सिद्धांत की शैक्षिक उपयोगिता

  1. शिक्षक को विषय वस्तु के प्रति अनुबंधन करना चाहिए।
  2. अच्छी आदतों का निर्माण किया जा सकता है।
  3. अनुशासन बच्चों में लाया जा सकता है।
  4. बुरी आदत तो वह क्या दी से छुटकारा मिल जाता है।
  5. सतर्क रहना।
  6. शिक्षण में दृश्य श्रव्य सामग्री का प्रयोग।
  7. पुनरावृति पर बल।
  8. यांत्रिक तरीके से सीखने पर बल।
  9. इसी प्रकार बालक को में प्रेम भावना का विकास होता है।
  10. भाषा को सीखने और सिखाने के लिए विशेष उपयोगी।
  11. आदतों के निर्माण में विशेष उपयोगी।
  12. भय संबंधित मानसिक भ्रांतियों को दूर करने में सहायक।

(Pavlov ka Anukulit Anukriya Siddhant For CTET 2020)

उपनाम

  • C-R थ्योरी
  • शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत
  • प्राचीन परंपरागत अनुबंधन सिद्धांत
  • समृद्ध प्रतिक्रिया प्रत्यावर्तन सिद्धांत
  • अनुबंधन का सिद्धांत
  • शरीर शास्त्री सिद्धांत
  • क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत

UCS –   unconditional stimulus   [अनुबंधित उद्दीपक (भोजन), स्वाभाविक उद्दीपक ]

CS –      conditional stimulus    [अनुबंधित उद्दीपक (घंटी), अस्वाभाविक उद्दीपक ]

UCR –   unconditional response    [अनुबंधित अनुक्रिया (लार), स्वाभाविक अनुक्रिया]

CR –      conditional response     [अनुबंधित अनुक्रिया (लार) ,अस्वाभाविक अनुक्रिया]

पावलाव के सिद्धांत पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

प्रश्न  C-R थ्योरी में UCS है?

उत्तर– भोजन

प्रश्न C-R थ्योरी में CR क्या है?

उत्तर- लार का आना

प्रश्न पावलाव ने किस पर प्रयोग किया?

उत्तर– कुत्ते पर (1904 में)

प्रश्न पावलाव कहां के रहने वाले थे?

उत्तर- रूस

प्रश्न अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत का उपनाम बताइए?

उत्तर-  C-R थ्योरी

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