REET 1st Level Environment Notes in Hindi

Teaching Method of Environment for REET Level 1

हेलो! दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके साथ पर्यावरण अध्ययन की प्रमुख विधियां (REET 1st Level Environment Notes in Hindi) शेयर करने जा रहे हैं जोकि सभी शिक्षक भर्ती परीक्षा जैसे- REET,UPTET,MPTET Gread-3 ,CTET आदि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इन सभी परीक्षाओं में पर्यावरण शिक्षण शास्त्र से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं उन प्रश्नों के सही उत्तर देने के लिए आवश्यक है कि आपको उसका संपूर्ण ज्ञान हो अभी आप उन प्रश्नों को प्रश्नों को आसानी से हल कर सकेंगे

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पर्यावरण अध्ययन की शिक्षण विधियां

विभिन्न प्रकार की शिक्षण विधियों का सहारा लेकर पर्यावरण अध्ययन को रोचक, प्रभावशाली, बोधगम्य बनाया जाता है जैसे-किसी प्रकरण को पढ़ाते समय, कहानी ,कविता, पहेली ,चित्र ,चार्ट ,वीडियो, फिल्म, या किसी प्रकरण के अनुसार विद्यार्थियों किसी विशेष स्थान पर ले जाया जाता है ताकि अधिक से अधिक ज्ञान इंद्रियों का उपयोग करने से उसका ज्ञान स्थाई हो जाए

शिक्षण विधियां दो प्रकार की होती हैं-

1.अध्यापक केंद्रित

  • व्याख्यान विधि
  • प्रदर्शन विधि

2. छात्र केंद्रित

  • खेल विधि
  • प्रश्नोत्तर विधि
  • शैक्षिक भ्रमण विधि
  • विश्लेषण विधि
  • संश्लेषण विधि
  • आगमन विधि

पर्यावरण अध्ययन के कुछ मुख्य शिक्षण विधियां इस प्रकार हैं-

1.भ्रमण विधि (Field trip)

2.प्रदत्त कार्य (Assignment)

3.प्रयोग प्रदर्शन विधि (Demonstration method)

4.समस्या समाधान विधि (problem solving method)

5.प्रयोजना विधि (project method)

6.अन्वेषण तथा खोज विधि (Heuristic method)

 

1.भ्रमण विधि

प्रोफेसर रहे इस विधि के जन्मदाता माने जाते हैं इस विधि में विद्यार्थियों को प्रकृति के निकट ले जाया जाता है

जैसे- दूरदर्शन केंद्र, रेडियो स्टेशन, बिजलीघर ,पार्क, चिड़ियाघर इत्यादि और भ्रमण से छोटे बच्चों को बहुत लाभ होता है उन्हें कक्षा से वास्तविक संसार की ओर ले जाया जाता है

  • भ्रमण की योजना
  • भ्रमण स्थल का चुनाव
  • ब्राह्मण की तैयारी
  • आवश्यक सामग्री
  • पर्यटन का मूल्यांकन

2.प्रदत्त कार्य

जब एक विद्यार्थी विद्यार्थियों के समूह अथवा संपूर्ण कक्षा को कुछ विशेष शिक्षक उत्तरदायित्व दिया जाता है तब इस प्रकार के कार्य को प्रदत्त कार्य कहते हैं

3.प्रयोग प्रदर्शन विधि

इस विधि में शिक्षक विद्यार्थियों के समक्ष प्रयोग प्रदर्शन कर विषय वस्तु को स्पष्ट करता है जिसमें उनकी सहभागिता भी ली जाती है इसे बहुत संवेदी शिक्षण विधि भी कहा जाता है

इस विधि में विद्यार्थी देखता सुनता और करके सीखता है ज्ञान स्थाई और स्पष्ट हो जाता है

(REET 1st Level Environment Notes in Hindi)

4.समस्या समाधान विधि

इस विधि में मानसिक क्रियाओं पर बल दिया जाता है अध्यापक द्वारा विद्यार्थियों के सम्मुख समस्या प्रस्तुत की जाती है जिस की समस्या विद्यार्थी अपने सीखे हुए नियम सिद्धांत एवं प्रत्यय यों की सहायता से करते हैं कठिनाई के स्तर का ध्यान रखकर समस्याओं का चयन किया जाता है

इसके सोपान हैं-

  • समस्या की उत्पत्ति एवं चयन
  • समस्या का परिभाषा करण
  • आवश्यक प्रदत्त एवं तथ्यों का संकलन
  • परिकल्पना का निर्माण एवं परीक्षण करना
  • सामान्य करण
  • निष्कर्षों के सतत का मूल्यांकन

5.प्रयोजना विधि

इस विधि का सुझाव जॉन duve ने दिया था तथा इसका प्रतिपादन किलपैट्रिक ने किया

किलपैट्रिक के अनुसार” प्रयोजन वाहन उद्देश्य पूर्ण कार्य है जिसे लगन के साथ सामाजिक वातावरण में संपन्न किया जाता है” जो व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों प्रकार के हो सकते हैं

इस विधि के विभिन्न सोपान हैं-

  • अवस्था बनाना
  • विषय वस्तु का चयन
  • योजना बनाना
  • प्रयोग को करना
  • प्रतिपुष्टि
  • रिपोर्ट तैयार करना
  • मूल्यांकन

6.अन्वेषण अथवा खोज विधि

इस विधि के जनक एच. ई आर्मस्ट्रांग है

जूरिस्टिक शब्द की उत्पत्ति यूनानी भाषा से हुई है जो hurisco शब्द से बना है इसका अर्थ होता है मैं सोचता हूं यह मालूम करता हूं

यह शिक्षण की ऐसी विधि है जिसमें विद्यार्थी अनुसंधानकर्ता के रूप में कार्य करता है उसे कुछ बताया नहीं जाता वह खुद ही खोज करते हैं इस विधि का प्रयोग विज्ञान सामाजिक विज्ञान प्रयोग एवं सिद्धांतों के प्रतिपादन में किया जाता है

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