UP Lekhapal 2020

Lekhpal ke Mahatvpurn Kagjat For UP Lekhapal 2020

UP Lekhapal 2020 : जानिए! भूमि पैमाइश संबंधी महत्वपूर्ण शब्दावली खसरा, खतौनी के बारे में। 

नमस्कार! दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे उत्तर प्रदेश में लेखापाल

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के द्वारा उपयोग की जाने (Lekhpal ke Mahatvpurn Kagjat For UP Lekhapal 2020) वाली महत्वपूर्ण शब्दावली और कागजात के बारे में जो उत्तर प्रदेश लेखपाल भर्ती परीक्षा 2020 की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है क्योंकि इससे प्रश्न परीक्षा में अवश्य ही पूछे जाएंगे इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने आपके लिए लेखपाल संबंधित महत्वपूर्ण शब्दावली को आपके साथ साझा किया। 

लेखपाल के कुछ महत्वपूर्ण कागजात ||Some Important papers of Lekhpal

  1. खसरा
  2. नक्शा
  3. खतौनी
  4. किसान बही
  5. सीमा चिन्हों की सूची
  6. गांव रजिस्टर
  7. खेबट

भूमि पैमाइश संबंधी महत्वपूर्ण शब्दावली 

नक्शा

प्रति गांव का एक नक्शा होता है जिसको हम सजरा भी कहते हैं

इस नक्शे पर गांव की चौहद्दी मतलब सीमा दर्ज रहती है इससे गांव की चौहद्दी के साथ-साथ सकते खेत की चौहद्दी का पता चलता है

नक्शे  का अनुरक्षण करने के लिए लेखपाल अपने लिखिए के प्रति गांव का हर वर्ष खेत में जाकर तीन बार निरीक्षण करेगा

लेखपाल का दौरा को राजस्व की भाषा में पड़ताल कहते हैं

प्रथम पड़ताल को खरीफ पड़ताल कहते हैं जो 10 अगस्त से प्रारंभ की जाती है। 

दूसरी पड़ताल को रवि पड़ताल कहते हैं जो 1 जनवरी से प्रारंभ होती है। 

तीसरी पड़ताल को जायद पड़ताल कहते हैं जो 1 मई से प्रारंभ होती है। 

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खसरा

यह लेखपाल का बहुत ही महत्वपूर्ण कागजात होता है इसको कहीं कहीं गिरदावरी भी कहते हैं जैसे पंजाब ,हरियाणा। 

खसरा स्वयं अधिकार अभिलेख नहीं है किंतु अधिकार अभिलेख की आधारशिला है। 

खसरा में 22 खाने होते हैं। 

कृषि आंकड़े और खतौनी के लिए जिन तत्वों की आवश्यकता होती है देश सब लेखपाल द्वारा खसरे में लिखते जाते हैं। 

इसका प्रयोग सजरा नामक दस्तावेज के साथ किया जाता है जिसने पूरे गांव का नक्शा होता है जो इस गांव की सभी भूमिपतियों की परिभाषा देता है। 

इन पत्तियों का ब्यौरा भी खतरों में होता है। 

खसरा में हर चीज और उसका क्षेत्रफल तथा उसका मालिक का और काम करने वाले ,उस पर उगने वाली फसलों तथा उसकी मिट्टी के प्रकार एवं उस पर लगे वृक्षों का विवरण होता है। 

खसरा कृषि संबंधी कानूनी दस्तावेज है। 

खतौनी

 खतौनी शब्द उत्तर प्रदेश भू राजस्व अधिनियम में वर्णित नहीं है लेकिन अधिनियम में वार्षिक प्रशिक्षण नामक जो कागजात धारा 33 में वर्णित है वहीं खतौनी के नाम से जाना जाता है। 

कहीं-कहीं इसको जमाबंदी भी कहते हैं जैसे- पंजाब और हरियाणा

अगर गांव की खतरों का प्रयोग करके किसी एक व्यक्ति या परिवार की जमीनों की सूची बनाई जाए तो उसे खतौनी कहेंगे। 

हर 6 साल में किसी नवीनीकृत किया जाता है। 

इसमें 13 खाने होते हैं। 

इसमें जोत्रो का वर्णन होता है कि यह किस हैसियत से भूमि धारण कर रहे होते हैं। 

किसान बही

यह लेखपाल द्वारा तैयार की गई वह दस्तावे जी पुस्तक होती है जो कि किसान के पास जाती है। 

किसान बही पर किसान की खेती उसका प्रकार मात्रा वाहक संबंधी विवरण होता है जिससे कि किसान अपनी भूमि की जानकारी रखता है। 

मात्र ₹10 शुल्क दिए जाने पर किसान को उपलब्ध कराई जाती है। 

सीमा चिन्हों की सूची

इस अभिलेख में सीमा और बंदोबस्त चिन्हों का वर्णन होता है। 

यह कागजात इसी विवाद ग्रस्त भूमिया सीमा विवाद को निपटाने में पर्याप्त होता है। 

यह कागजात खसरा में ही नत्थी रहता है। 

गांव रजिस्टर

यह रजिस्टर धारा-31 के अंतर्गत कलेक्टर द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में तैयार कराया जाता है।  जिसमें तीन बातों का उल्लेख रहता है। 

  1. नई प्रक्रिया से प्रभावित क्षेत्र
  2. एहत वाली खेती वाले क्षेत्र
  3. जिसकी मालगुजारी पूर्णता समाप्त कर दी गई हो वाले क्षेत्र

खेवट

यह जमीनदारी का एक रजिस्टर होता था। 

सन 1950 में उत्तर प्रदेश जमीदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम के लागू होने से पहले दो अधिकार होते थे- खेवट और खतौनी। 

खतौनी अभी रखी जाती है क्योंकि यह एक ऐसा रजिस्टर होता है जिसमें यह वर्णन होता है कि कौन जोतदार किस हैसियत से भूमि को धारण कर रहा है। 

लेकिन खेवट जमीदार और जमीदारी से संबंधित रजिस्टर्ड था इसलिए जमीदारी उन्मूलन के बाद इसे बंद कर दिया गया। 

लेखपाल संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • पटवारी राजस्व विभाग का ही कर्मचारी होता है। 
  • पटवारी प्रणाली का प्रारंभ सर्वप्रथम शेरशाह सूरी के शासनकाल में हुआ था। 
  • मुगल सम्राट अकबर ने इसे बढ़ावा दिया तथा ब्रिटिश काल में इतने मामूली परिवर्तन हुए किंतु प्रणाली जारी रही वर्ष 1918 में सभी गांव में सरकार के प्रतिनिधि के रुप में लेखपाल नियुक्त किया गया। 
  • उत्तर प्रदेश में पटवारी के पद को चौधरी चरण सिंह के जमाने में ही समाप्त कर दिया गया था और अब उन्हें लेखपाल कहा जाता है। 

दोस्तों उपरोक्त आर्टिकल में हमने लेखपाल के लिए आवश्यक (Lekhpal ke Mahatvpurn Kagjat For UP Lekhapal 2020) शब्दावली और कागजात जैसे- खसरा, खतौनी आदि को विस्तारपूर्वक समझाया है जिससे आपको उन्हें समझने में आसानी होगी और इससे संबंधित प्रश्नों को हल करने में मदद मिलेगी धन्यवाद!

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