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Lekhpal ke Mahatvpurn Kagjat For UP Lekhapal 2020

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Lekhpal ke Mahatvpurn Kagjat For UP Lekhapal 2020

UP Lekhapal 2020 : जानिए! भूमि पैमाइश संबंधी महत्वपूर्ण शब्दावली खसरा, खतौनी के बारे में।

नमस्कार! दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे उत्तर प्रदेश में लेखापाल के द्वारा उपयोग की जाने (Lekhpal ke Mahatvpurn Kagjat For UP Lekhapal 2020) वाली महत्वपूर्ण शब्दावली और कागजात के बारे में जो उत्तर प्रदेश लेखपाल भर्ती परीक्षा 2020 की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है क्योंकि इससे प्रश्न परीक्षा में अवश्य ही पूछे जाएंगे इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने आपके लिए लेखपाल संबंधित महत्वपूर्ण शब्दावली को आपके साथ साझा किया।

लेखपाल के कुछ महत्वपूर्ण कागजात ||Some Important papers of Lekhpal

  1. खसरा
  2. नक्शा
  3. खतौनी
  4. किसान बही
  5. सीमा चिन्हों की सूची
  6. गांव रजिस्टर
  7. खेबट

भूमि पैमाइश संबंधी महत्वपूर्ण शब्दावली

नक्शा

प्रति गांव का एक नक्शा होता है जिसको हम सजरा भी कहते हैं

इस नक्शे पर गांव की चौहद्दी मतलब सीमा दर्ज रहती है इससे गांव की चौहद्दी के साथ-साथ सकते खेत की चौहद्दी का पता चलता है

नक्शे का अनुरक्षण करने के लिए लेखपाल अपने लिखिए के प्रति गांव का हर वर्ष खेत में जाकर तीन बार निरीक्षण करेगा

लेखपाल का दौरा को राजस्व की भाषा में पड़ताल कहते हैं

प्रथम पड़ताल को खरीफ पड़ताल कहते हैं जो 10 अगस्त से प्रारंभ की जाती है।

दूसरी पड़ताल को रवि पड़ताल कहते हैं जो 1 जनवरी से प्रारंभ होती है।

तीसरी पड़ताल को जायद पड़ताल कहते हैं जो 1 मई से प्रारंभ होती है।

खसरा

यह लेखपाल का बहुत ही महत्वपूर्ण कागजात होता है इसको कहीं कहीं गिरदावरी भी कहते हैं जैसे पंजाब ,हरियाणा।

खसरा स्वयं अधिकार अभिलेख नहीं है किंतु अधिकार अभिलेख की आधारशिला है।

खसरा में 22 खाने होते हैं।

कृषि आंकड़े और खतौनी के लिए जिन तत्वों की आवश्यकता होती है देश सब लेखपाल द्वारा खसरे में लिखते जाते हैं।

इसका प्रयोग सजरा नामक दस्तावेज के साथ किया जाता है जिसने पूरे गांव का नक्शा होता है जो इस गांव की सभी भूमिपतियों की परिभाषा देता है।

इन पत्तियों का ब्यौरा भी खतरों में होता है।

खसरा में हर चीज और उसका क्षेत्रफल तथा उसका मालिक का और काम करने वाले ,उस पर उगने वाली फसलों तथा उसकी मिट्टी के प्रकार एवं उस पर लगे वृक्षों का विवरण होता है।

खसरा कृषि संबंधी कानूनी दस्तावेज है।

खतौनी

खतौनी शब्द उत्तर प्रदेश भू राजस्व अधिनियम में वर्णित नहीं है लेकिन अधिनियम में वार्षिक प्रशिक्षण नामक जो कागजात धारा 33 में वर्णित है वहीं खतौनी के नाम से जाना जाता है।

कहीं-कहीं इसको जमाबंदी भी कहते हैं जैसे- पंजाब और हरियाणा

अगर गांव की खतरों का प्रयोग करके किसी एक व्यक्ति या परिवार की जमीनों की सूची बनाई जाए तो उसे खतौनी कहेंगे।

हर 6 साल में किसी नवीनीकृत किया जाता है।

इसमें 13 खाने होते हैं।

इसमें जोत्रो का वर्णन होता है कि यह किस हैसियत से भूमि धारण कर रहे होते हैं।

किसान बही

यह लेखपाल द्वारा तैयार की गई वह दस्तावे जी पुस्तक होती है जो कि किसान के पास जाती है।

किसान बही पर किसान की खेती उसका प्रकार मात्रा वाहक संबंधी विवरण होता है जिससे कि किसान अपनी भूमि की जानकारी रखता है।

मात्र ₹10 शुल्क दिए जाने पर किसान को उपलब्ध कराई जाती है।

सीमा चिन्हों की सूची

इस अभिलेख में सीमा और बंदोबस्त चिन्हों का वर्णन होता है।

यह कागजात इसी विवाद ग्रस्त भूमिया सीमा विवाद को निपटाने में पर्याप्त होता है।

यह कागजात खसरा में ही नत्थी रहता है।

गांव रजिस्टर

यह रजिस्टर धारा-31 के अंतर्गत कलेक्टर द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में तैयार कराया जाता है। जिसमें तीन बातों का उल्लेख रहता है।

  1. नई प्रक्रिया से प्रभावित क्षेत्र
  2. एहत वाली खेती वाले क्षेत्र
  3. जिसकी मालगुजारी पूर्णता समाप्त कर दी गई हो वाले क्षेत्र

खेवट

यह जमीनदारी का एक रजिस्टर होता था।

सन 1950 में उत्तर प्रदेश जमीदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम के लागू होने से पहले दो अधिकार होते थे- खेवट और खतौनी।

खतौनी अभी रखी जाती है क्योंकि यह एक ऐसा रजिस्टर होता है जिसमें यह वर्णन होता है कि कौन जोतदार किस हैसियत से भूमि को धारण कर रहा है।

लेकिन खेवट जमीदार और जमीदारी से संबंधित रजिस्टर्ड था इसलिए जमीदारी उन्मूलन के बाद इसे बंद कर दिया गया।

लेखपाल संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • पटवारी राजस्व विभाग का ही कर्मचारी होता है।
  • पटवारी प्रणाली का प्रारंभ सर्वप्रथम शेरशाह सूरी के शासनकाल में हुआ था।
  • मुगल सम्राट अकबर ने इसे बढ़ावा दिया तथा ब्रिटिश काल में इतने मामूली परिवर्तन हुए किंतु प्रणाली जारी रही वर्ष 1918 में सभी गांव में सरकार के प्रतिनिधि के रुप में लेखपाल नियुक्त किया गया।
  • उत्तर प्रदेश में पटवारी के पद को चौधरी चरण सिंह के जमाने में ही समाप्त कर दिया गया था और अब उन्हें लेखपाल कहा जाता है।

दोस्तों उपरोक्त आर्टिकल में हमने लेखपाल के लिए आवश्यक (Lekhpal ke Mahatvpurn Kagjat For UP Lekhapal 2020) शब्दावली और कागजात जैसे- खसरा, खतौनी आदि को विस्तारपूर्वक समझाया है जिससे आपको उन्हें समझने में आसानी होगी और इससे संबंधित प्रश्नों को हल करने में मदद मिलेगी धन्यवाद!

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोक नृत्य|Uttar Pradesh folk dance list in Hindi

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नमस्कार! दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे उत्तर प्रदेश राज्य के (Uttar Pradesh ke Pramukh Lok Nritya) प्रमुख प्रमुख लोक नृत्य के बारे में, जोकि जो की परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा में इससे संबंधित प्रश्न अवश्य ही पूछे जाते हैं

यूपी के लोक नृत्य राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं. जोकि विभिन्न  मौकों/अवसरों पर यहाँ के लोगों द्वारा किये जाते हैं,। भगवान राम और भगवान कृष्ण जैसे दिव्य पात्रों की पौराणिक कहानियों पर आधारित नृत्य नाटक पारंपरिक सार को दर्शाते हैं। उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोक नृत्य में रासलीला, रामलीला, ख्याल, नौटंकी, नकाल, स्वांग, दादरा और चरकुला नृत्य शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोक नृत्य की सूची|Uttar Pradesh ke Pramukh Lok Nritya

चरकुला

  • एक घड़ा नृत्य है जो ब्रजभूमि का प्रसिद्ध है। यह नृत्य सिर पर रथ का पहिया रखकर उस पर कई घड़ों को रखकर किया जाता है।
  • लकड़ी के पिरामिड को 108 तेल के दीपक से रोशन किया जाता है। महिलाएं भगवान कृष्ण के ‘रसिया’ गीतों पर नृत्य करती हैं
  • यह उत्तर प्रदेश का एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जो राज्य के ब्रज क्षेत्र में व्यापक रूप से किया जाता है।

नौटंकी

  • उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक प्रचलित लोकनृत्य है, जिसका मूल स्वरूप, वीथि नाटक का है। इसमें हाथरसी तथा कानपुरी नाट्य शैलियों द्वारा संवाद, गायन एवं लोकनृत्य के माध्यम से लोक कथाओं का प्रदर्शन किया जाता है।
  • नौटंकी लोकगीतों और लोक गीतों और नृत्यों के साथ मिश्रित पौराणिक नाटकों से युक्त है। कई बार, नौटंकी कलाकार उन परिवारों से हैं, जो पीढ़ियों से इस पेशे में हैं।

धोबिया राग

  • यह धोबी जाति का नृत्य है, इसमें एक नर्तक धोबी तथा दूसरा उसका गधा बनता है।

कलाबाजी

  • अवध क्षेत्र के इस नृत्य में नर्तक कच्ची घोड़ी पर सवार होकर तथा मोर बाजा (विंड पाइप) लेकर कलाबाजी करते हुए नृत्य करते हैं।

जोगिनी

  • साधु वेशधारी स्त्री रूप पुरूष नर्तक तथा साधुवेशधारी पुरूष नर्तकों द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है।

पाई डंडा

  • यह बुन्देलखण्ड का प्रसिद्ध नृत्य है, जो अहीरों द्वारा किया जाता है।

राई नृत्य

  • यह बुन्देलखण्ड की महिलाओं द्वारा किया जाता है।

धुरिया समाज

  • यह बुन्देलखण्ड क्षेत्र की कुम्हार जाति के नर्तक पुरूषों द्वारा स्त्री वेश धारण करके प्रस्तुत किया जाता है।

शैरा नृत्य

  • यह बुन्दलेखण्ड क्षेत्र के हमीरपुर, झांसी तथा ललितपुर जिलों में प्रसिद्ध है। यह नृत्य वर्षा ऋतु में युवकयुवतियों द्वारा हाथ में डंडा लेकर किया जाता है।

नटवरी नृत्य

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश के अहीरों तथा यादवों में प्रचलित यह नृत्य संगीत एवं नक्कारों की लय पर खेल मुद्राओं में प्रदर्शित किया जाता है।

धीवर राग

  • यह धीवर अथवा कहार जाति द्वारा किया जाने वाला गायन नृत्य मांगलिक अवसरों पर किया जाता है।

छोलिया

  • राजपूतों में प्रचलित इस नत्य गीत का प्रस्तुतिकरण तलवार और ढाल लेकर किया जाता है।

करमानृत्य

  • यह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में केवल कोल जनजातियों के स्त्री एवं पुरूषों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है

रासलीला

  • इस राज्य में की गई रासलीला को ब्रज रासलीला के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र से उत्पन्न हुई थी। यह एक नाट्य रूप है, जो अब कई भारतीय राज्यों में किया जाता है।
  • यहां, कहानी भगवान कृष्ण के आकर्षक बचपन, किशोरावस्था और शुरुआती युवाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां यह अपनी पत्नी राधा के साथ भगवान कृष्ण के रिश्ते की पड़ताल करता है।

रामलीला

  • रामलीला को उत्तर प्रदेश का एक लोकप्रिय पारंपरिक लोक नृत्य माना जाता है। यह मुख्य रूप से रामायण में भगवान राम के जीवन से संबंधित है, जो भगवान विष्णु के अन्य अवतार भी हैं।
  • इस नृत्य में अयोध्या से भगवान राम के वनवास, रावण पर उनकी सफलता और सीता के साथ उनकी बातचीत की कहानी को दर्शाया गया है।

ख्याल

  • ख्याल उत्तर प्रदेश का एक और लोक नृत्य है, जो कई अन्य भारतीय राज्यों में एक साथ लोकप्रिय है और यह उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख लोक नृत्य के रूप में शुरू हुआ। ख़्याल में अलग-अलग शैली हैं, हर एक को शहर, अभिनय शैली, समुदाय या लेखक के नाम से जाना जाता है।
  • कुछ लोकप्रिय ख्याति जयपुरी ख्याल, अभिनया ख्याल, गढ़स्प खयाल और अली बख्श ख्याल हैं, जहां सूक्ष्मता इन विविधताओं का सीमांकन करती है। आम तौर पर, ये लोक नृत्य पौराणिक होते हैं,
  • जो पुराणों में विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हैं और इन्हें बहुत रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाता है, हालांकि, ये इन घटनाओं के ऐतिहासिक पहलुओं का भी पता लगाते हैं।
  • इन प्रदर्शनों को रोमांस, बहादुर कामों, भावनाओं और विश्वासों आदि जैसे तत्वों की उपस्थिति से भी चिह्नित किया जाता है।

नक़ल

  • उत्तर प्रदेश का यह लोक नृत्य बहुत लोकप्रिय है और मनोरंजन का एक पसंदीदा तरीका है, क्योंकि यह बहुत ही आनंददायक है, और यह सूक्ष्म और व्यंग्यात्मक रूप से जीवन पर फैली अप्रिय छाया को प्रस्तुत करता है।
  • नक़ल के सभी नाटकों में एक कहानीकार का चरित्र है, जहाँ आम तौर पर विषय एक आम आदमी पर आधारित होते हैं। आम आदमी आम तौर पर नाटक के केंद्र में होता है। आमतौर पर मिरासी, नक़ल और भांड समुदाय के लोग विशेष कौशल के साथ इस कला का प्रदर्शन करते हैं।

स्वांग

  • यह एक प्रकार का लोक नाटक है जिसे गीतों से समृद्ध किया जाता है। इसे साहित्यिक संपदा के साथ एक समृद्ध प्रदर्शन माना जाता है।
  • इस प्रदर्शन की साजिश महान हस्तियों की कहानियों पर आधारित है; पूरन नाथ जोगी, गोपी नाथ और वीर हकीकत राय के स्वांग बहुत लोकप्रिय हैं।
  • पुराण नाथ जोगी और गोपी नाथ के स्वांगों में, टुकड़ी के जीवन और काकीकत राय के स्वांग में, कलात्मक कौशल द्वारा धर्म के प्रेम को प्रस्तुत किया जाता है। उत्तर प्रदेश के इस लोक नृत्य की लोकप्रियता कलाकारों की वार्तालाप क्षमता पर है।

दादरा

  • दादरा उत्तर प्रदेश का एक अत्यंत लोकप्रिय लोक नृत्य है। मुख्य रूप से यह नृत्य रूप गुप्त और यौन सुख के इर्द-गिर्द घूमता है।
  • इस नृत्य में, गायक कलाकारों को प्लेबैक देते हैं, जो मंच पर प्रदर्शन कर रहे हैं; वे गायकों के साथ लिप-सिंक करते हैं।

यही कहा जाता है कि लोकनृत्यों का भी विषयवस्तु लोकगीतों की तरह सांस्कृतिक परम्पराओं पर आधारित होता है। इसकी निरन्तरता संस्कृति संरक्षण को प्रोत्साहित करती है यद्यपि अब आधुनिक सिनेमा एवं अन्य मनोरंजन के साधनों की उपलब्धता ने लोकनृत्यों का महत्व कम किया है

दोस्तों उपरोक्त आर्टिकल में हमने जाना उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोक नृत्य (Uttar Pradesh ke Pramukh Lok Nritya) के बारे में जो कि उत्तर प्रदेश की पहचान है और परीक्षा में भी इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं आशा है कि आप इनका ध्यान पूर्वक अध्ययन करेंगे परीक्षा में इससे संबंधित प्रश्नों को आसानी से हल कर पाएंगे धन्यवाद!

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UP Lekhapal Exam 2021:ग्रामीण समाज और विकास के महत्वपूर्ण सवाल

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उत्तर प्रदेश लेखपाल भर्ती परीक्षा 2021: उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग में जल्द ही 8200 पदों पर भर्ती होने की संभावना है इस भर्ती में सबसे पहले उत्तर प्रदेश लोक लेखपाल भर्ती 2021 के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगेयदि आप भी इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो इस आर्टिकल में दी गई जानकारी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, उत्तर प्रदेश लेखपाल भर्ती परीक्षा के लिए हम इस आर्टिकल में ग्रामीण समाज विकास के कुछ महत्वपूर्ण सवाल (Gramin Parivesh UP Lekhapal MCQ) आपके लिए लेकर आए हैं, जो आपकी आने वाली लेखपाल भर्ती परीक्षा के लिए बेहद ही मददगार साबित हो सकते हैं I

MCQ on Gramin Parivesh for UP Lekhapal 2021

Q.1 उत्तर प्रदेश के किन जिलों में पटसन की खेती की जाती है ?

a) देवरिया और गोरखपुर

b) सहारनपुर और हरदोई

c) इलाहाबाद और फतेहपुर

d) मथुरा और अलीगढ़

Ans- (a)

Q.2 गेहूं की खेती के लिए कौन से उर्वरक का उपयोग करेंगे ?

a) नाइट्रोजन

b) तांबा

c) पोटेशियम

d) लोहा

Ans- (a)

Q.3 भूमि का उपयोग करने के एवज में किसानों से वसूल किया जाने वाला टैक्स कौन सा है

a) लगान

b) विक्रय कर

c) आयकर

d) उपकर

Ans- (a)

Q.4 ब्रिटिश शासन के दौरान उत्तर प्रदेश में भूलनी पंजीकरण किस अधिकारी द्वारा किया जाता था ?

a) लिपिक

b) लेखपाल

c) काजी

d) राज्यपाल

Ans- (b)

Q.5 उत्तर प्रदेश की प्रमुख फसल है ?

a) गन्ना

b) गेहूँ

c) चना

d) चावल

Ans- (b)

Q.6 एक व्यक्ति के लिए पंचायत का सदस्य बनने की न्यूनतम आयु सीमा कितनी है ?

a) 21वर्ष

b) 23 वर्ष

c) 35 वर्ष

d) 18 वर्ष

Ans- (a)

Q.7 जोत बही में पृष्ठो की संख्या कितनी होती है ?

a) 4

b) 8

c) 16

d) 20

Ans-(c)

Q.8 बसंत ऋतु की फसलों की बुवाई कब की जाती है ?

a) जून-जुलाई

b) मध्य फरवरी से मध्य मार्च

c) अप्रैल-मई

d) इनमें से कोई नहीं

Ans-(b)

Q.9 लेखपाल खसरा तैयार करके अगले वर्ष जमा कर देता है ?

a) ग्राम प्रधान के पास

b) रजिस्टार कानूनगो के पास

c) तहसीलदार के पास

d) जिला कृषि अधिकारी के पास

Ans-(b)

Q.10 ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुख सुविधाएं प्रदान करना PURA योजना किसके द्वारा प्रतिपादित है ?

a) डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आजाद

b) अटल बिहारी बाजपेई

c) मनमोहन सिंह

d) जयप्रकाश नारायण

Ans-(a)

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  1. List of Uttar Pradesh Folk Dance in Hindi     Click Here
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List of Famous Anusandhan in Uttar Pradesh pdf | UP GK

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Anusandhan in Uttar Pradesh

Uttar Pradesh ke Pramukh Anusandhan |UP GK

नमस्कार! दोस्तों आज के इस आर्टिकल में है उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान का ही एक टॉपिक (List of Famous Anusandhan in Uttar Pradesh pdf) उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख अनुसंधान की सूची आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं जो कि आने वाले प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत ही उपयोगी है-

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  1. List of Uttar Pradesh Folk Dance in Hindi Click Here
  2. Uttar Pradesh Mantrimandal List 2020 in Hindi Click Here

उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख अनुसंधान की सूची

s.no. संस्थान का नाम स्थान
1. बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट ग्रेटर नोएडा
2. लेदर टेक्नोलॉजी पार्क – बंथरा (उन्नाव)
3. नेशनल सेंटर फॉर एग्रोफोरेस्ट्री झांसी
4. नेशनल बायोफर्टिलाइजर डेवलपमेंट सेंटर – गाजियाबाद
5. नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ थलमलोजी सीतापुर
6. नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज लखनऊ
7. खाद्य अनुसंधान एवं मानकीकरण प्रयोगशाला – गाजियाबाद
8. कपड़ा रिसर्च इंस्टीट्यूट गाजियाबाद
9. कपड़ा रिसर्च इंस्टीट्यूट – गाजियाबाद
10. पशु जैविक औषधि संस्थान लखनऊ
11. राष्ट्रीय कथक संस्थान – लखनऊ
12. राजकीय फल संरक्षण एवं डिब्बा बंदी संस्थान – लखनऊ
13. नेशनल एकेडमी ऑफ स्टैटिकल एंड मिनिस्ट्रेशन – नोएडा
14. इंडियन ग्रेन स्टोरेज इंस्टीट्यूट – हापुड़
15. सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट – लखनऊ
16. इंडियन शुगर केन रिसर्च इंस्टीट्यूट – लखनऊ
17. सेंट्रल मैंगो रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ
18. सेंट्रल पोटैटो (आलू) रिसर्च सेंटर – मेरठ
19. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मथुरा
20. सेंट्रल टैक्सटाइल इंस्टीट्यूट – कानपुर
21. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ शुगर टेक्नोलॉजी – कानपुर
22. केंद्रीय उपोषण बगवानी संस्थान – लखनऊ
23. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी रायबरेली
24. राजीव गांधी पैट्रोलियम इंस्टीट्यूट – अमेठी
25. भारतीय कालीन औद्योगिक संस्थान – भदोही
26. इंडियन पल्सेस रिसर्च इंस्टीट्यूट – कानपुर
27. पशु जैविक औषधि संस्थान – लखनऊ
28. सेंट्रल ग्रेसलैंड एंड फॉडर रिसर्च इंस्टीट्यूट – झांसी
29. ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला लखनऊ
30. सेंट्रल एविएशन (पक्षी) रिसर्च इंस्टीट्यूट – इज्जत नगर
31. नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर मीट – इज्जत नगर
32. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी – रायबरेली
33. सेंट्रल लेप्रोसी इंस्टीट्यूट – आगरा
34. नेशनल पैराशूट ट्रेनिंग कॉलेज आगरा
35. वीवी गिरी नेशनल लेबर इंस्टिट्यूट – नोएडा
36. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ वेजिटेबल रिसर्च – वाराणसी
37. स्कूल ऑफ़ पेपर टेक्नोलॉजी – सहारनपुर
38. नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट – लखनऊ
39. सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन कैटल – मेरठ
40. इंडस्ट्रियल टेक्स्लाजी रिसर्च सेंटर – लखनऊ
41. इंडियन इंस्टीट्यूट आफ हैंडलूम टेक्नोलॉजी – वाराणसी
42. उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान संस्थान – लखनऊ
43. केंद्रीय ग्लास एवं सिरेमिक अनुसंधान संस्थान – खुर्जा
44. इंडियन वेटरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट – बरेली
45. डॉ आंबेडकर पर्यावरण म्यूजियम – लखनऊ
46. कांच उद्योग विकास केंद्र – फिरोजाबाद
47. फ्रिग्नंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर – कन्नौज
48. राजकीय चर्म संस्थान – कानपुर
49. डॉक्टर अंबेडकर टेक्नोलॉजी फॉर हैंडिकैप्ड कानपुर
50. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद – शाहजहांपुर
51. वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र – महोबा
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